कुछ छायाचित्र

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 कुछ छायाचित्र पोस्ट कर रहा हमारे जिले के होनहार युवा साथी महेंद्र के............
  बहुत मेहनत से छायाकार  हैं: महेंद्र -9829046603..ने तैयार किये है......उन्हें


अपनी राय जरुर दीजिएगा.,ताकी  सफ़र जारी रहे.

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सादर,
माणिक

आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से जुड़ाव

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''काव्योत्सव''
में 25 मई तक

प्रकृति,बरसात,सावन,आषाड़,धूप,किसान,विरह,जनवाद,दलित
विमर्श,अबला-सबला विमर्श,समाजवाद,विषम समाज विषय पर कवितायें आमंत्रित
है.जिनका प्रकाशन http://apnimaati.blogspot.com पर 1 जून से होगा.
ये आलम आपको बहुत सा प्यार देगा,एक बार इसकी तरफ मुड कर प्यार से देखिएगा.
ऐसे में दिल करता है बस यहीं बस जाऊं.मगर यहाँ रहने वालों का दिल जानता है.कि कितनी मुसीबतें है यहाँ.
ये हरियाली हमारे इलाके में नहीं है क्योंकि हम पेड़ों को रहने ही नहीं देते
ब्रम्पुत्र एक्सप्रेस है,बहुत लम्बी है,कभी कभार ज़िन्दगी भी बहुत लम्बी लगती है.सच है ना.
एक दिन सभी को डूब जाना है.वैसे ये नोर्थ इस्ट भारत की तस्वीर है जो चलती ट्रेन में ली गयी है.


















































अपनी माटी पर ''काव्योत्सव'': कवितायें आमंत्रित हैं

अपनी माटी पर कविता प्रकाशन
पाठक और ब्लॉगर साथियों
नमस्कार,
पतझड़ जारी है,पूरा जेठ आषाड़ बाकी है,बरसाती मौसम भी आयेगा,मगर हाँ सावन की खुशबू भी महकेगी,इसी आलम में याद किया है आपको इस आयोजन के लिए जो आपके सहयोग से ऑनलाइन प्रकाशन का उत्सव बनेगा.आपको ये आमंत्रण भेजते हुए बहुत ख़ुशी है कि हम अपनी माटी ब्लॉग पर ''काव्योत्सव'' का आयोजन कर रहे है. हमने ब्लॉग्गिंग कि दुनिया में बहुत कम समय पहले ही कदम रखा था,मगर हमें बहुत अच्छा सहयोग मिला है. आपके साथ मिलकर ही हम अच्छी और श्रेष्ठ रचनाओं के प्रकाशन का ये जिम्मा ले रहे हैं.आपसे निवेदन है कि यदि आप या आपके सपर्क में कोई कवितानुमा कुछ लिखते हैं,तो कृपया ये सूचना उन तक भी पहुंचाने का कष्ट करिएगा.
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हम रचनाएँ 25 मई 2010 तक स्वीकार करेंगे,सभी कवितायें रचानाकार की स्वयं की लिखी हो,इसका सत्यापन करके रचनाएँ हम तक भेजना होगा.कृपया कवितायें स्तरीय होने पर ही शामिल की जायेगी.रचनाएँ प्रकाशित और अप्रकाशित हो सकती है.साथ ही सभी प्रकार के अधिकार रचनाकार के स्वयं के होंगे. किसी भी प्रकार के विवाद की स्तिथि में रचनाओं में लिखे विचारों को लेकर रचनाकार ही स्वयं जिम्मेदार होंगे.
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रचनाओं का प्रकाशन 1 जून 2010 से अपनी माटी ब्लॉग पर नियमित रूप से रोजाना होगा.ये सिलसिला बरसात ऋतु के समापन तक चलेगा. सिलसिले की सीमा आप लोगों के द्वारा भेजी जाने वाले रचनाओं की संख्या पर भी निर्भर करेगी.. मगर हम आपसे बहुत आशा लगाए बैठे हैं.
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रचनाओं के विषय वैसे बांधे नहीं जा सकते हैं,फिर भी.कुछ निवेदित हैं
  • प्रकृति
  • बरसात
  • सावन
  • आषाड़
  • धूप
  • किसान
  • विरह
  • जनवाद
  • दलित विमर्श
  • अबला-सबला विमर्श
  • समाजवाद
  • विषम समाज
बाकी आपके विवेक पर निर्भर रहेगा.बस राजनैतिक रूप से विवादास्पद रचनाओं के चयन से हम बचेंगे.
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रचनाये हिंदी के किसी फॉण्ट में हों या फिर यूनिकोड में भी बदल कर भेज सकते हैं.रचनाएँ भेजने का ई-मेल पता है. manikspicmacay@gmail.com
रचनाओं के साथ रचनाकार के जीवन से जुड़ा संक्षिप्त परिचय और एक ठीक-ठाक फोटो भी भेजिएगा.
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आपकी रचानाओं का इन्तजार आरम्भ हो गया है.आपके सहयोग पर ही हमारा ये प्रयास आगे की गति के लिए प्रेरणा बनेगा.

सम्पादन मंडल के लिए

सन्डे का विडियो


इस बार हम सन्डे के विडियो में मध्य प्रदेश की नर्मदा नदी जो होशंगाबाद के आसपास बहती हुयी है,का है. इस गीत में,बहुत मेहनत के साथ अशोक जमनानी ने गीत लिखा है और नमन तिवारी ने गाया है. इस तरह के गीत जो ज़मीं से जुड़े भी लगते है. और अपनी संस्कृति को बढावा देने वाले भी हो,अच्छे लगते है.आज आपकी नज़र कर रहे है.

राजस्थानी रचनाकारां सारू सूचना

राजस्थानी रचनाकारां सारू सूचना

राजस्थानी जन-जन ताईं पूगै इण सारू बोधि प्रकाशन पुस्तक पर्व योजना रै तै'त 'राजस्थानी साहित्य माळा' छापण री तेवड़ी है। इण योजना में राजस्थानी रा दस रचनाकरां री एक-एक पोथी रो सैट ऐकै साथै प्रकाशित होय सी। ऐ दस पोथ्यां कहाणी, नाटक, एकांकी, लघुकथा, संस्मरण, व्यंग्य, रेखाचित्र, निबंध, कविता, गज़ल आद विधा में होय सी। साफ है एक विधा में एक टाळवीं पोथी। कुल दस पोथी रै एक सैट री कीमत 100/- (सौ रिपिया) होय सी। इण पोथी माळा रो संयोजन राजस्थानी रा चावा साहित्यकार श्री ओम पुरोहित 'कागद' नै थरपियो है।

योजना में सामल होवण सारू 15 मई, 2010 तक इण ठिकाणै माथै रुख जोड़ो-

श्री ओम पुरोहित 'कागद'
24, दुर्गा कॉलोनी, हनुमानगढ़ संगम-335512
खूंजै रो खुणखुणियो : 9414380571

बोधि प्रकाशन
एफ-77, सेक्टर-9,
रोड नं.-11, करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया,
बाईस गोदाम, जयपुर

सन्डे का विडियो

राष्ट्रीय एकता जिंदाबाद

वक़्त के साथ जहां खेमेबाज़ी चल रही है. ज़हर घोलने वालो की ज़मात बढ़ रही हैं ऐसे में आओ मिलकर एक बार फिर से गायें रोजाना ये गीत.जिसमे हमारे देश का गुणगान है,मिट्टी का गान है.अपना-अपना राग आलापना कुछ देर छोड़,कुछ सामलाती बात करें.माणिक