कवि सम्मलेन : जोहर स्मृति संसथान चित्तोडगढ

कवि : अमृत 'वाणी' चंगेरिया (कुमावत )
कविता : मेवाड़ इतिहास (दोहा )
कवि सम्मलेन : जोहर स्मृति संसथान चित्तोडगढ
दिनांक : 29-03-2011



कवि : अमृत 'वाणी' चंगेरिया (कुमावत )
कविता : बांरा बिन्द
कवि सम्मलेन : जोहर स्मृति संसथान चित्तोडगढ
दिनांक : 29-03-2011









राजस्थान दिवस पर सगळे साथियां ने मोकळी बधाइयां .............. जै राजस्थान , जै राजस्थानी !!
अमृत 'वाणी'

विश्वकर्मा जयंती पर आप सभी को बहुत बहुत बधाई

Congratulations To You Vishwakarma Jayanti

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विश्वकर्मा

देव विश्वकर्मा सुनो, हें प्रथम आर्किटेक्ट
निर्माण-कार्य की रची , सुन्दर-सुन्दर टेक्ट ।।
सुन्दर - सुन्दर टेक्ट , रचि आप अमरावती
आत्मज प्रभासवसु , मामा गुरु बृहस्पति ।।
कह `वाणी´ कविराज, आपने रची द्वारिका
सब गांवन में जाय , देव फिर रचो द्वारिका ।।


शब्दार्थ : विश्वकर्मा = निर्माण कार्य के आदि देव (देवताओं के मुख्य अभियंता) , आिर्कटेक्ट = वास्तु-शास्त्री,टेक्ट = तरकीब, गूढ रहस्य, अमरावती = इन्द्रपुरी, आत्मज = पिता, बृहस्पति = देवताओं के गुरु

भावार्थ : वास्तुशास्त्र के आदि गुरु विश्वकर्मा एवं मय हुए हैं। मय दानव संस्कृति के तो विश्वकर्मा देव संस्कृति के प्रथम वास्तुशास्त्री थे। आपने लौकिक व दिव्य ज्ञान के द्वारा देवाधिपति इन्द्र के लिये सुन्दर अमरावती का निर्माण कर स्वर्गलोक की शोभा बढ़ाई। पारिवारिक संबंधोंं में आप प्रभासवसु के पुत्र, देवगुरु बृहस्पति के भांजे एवं सृष्टि के प्रथम सम्राट राजा पृथु के समकालीन थे।
`वाणी´ कविराज कहते हैं कि भगवान् श्रीकृष्ण के लिए आपने द्वारिका की रचना कर इस मृत्युलोक को भी एक अनुपम अलौकिक उपहार दिया। अंत में कवि निवेदन करते हैं कि हे प्रभु विश्लिंकवकर्मा ! आप इस युग में भी गांव-गांव, शहर-शहर जाकर असंख्य द्वारिकाओं की रचना करते हुए कोटि-कोटि जन को विभिन्न प्रसन्नताएँ प्रदान


From:-
भारतीय वास्तु शास्त्र

अमृत
'वाणी'

इंटरनेट पर राजस्थानी राज

इंटरनेट पर राजस्थानी राज
 

अजय कुमार सोनी
इंटरनेट पर राजस्थानी राजराजस्थानी भाषा को ख्याति दिलाने में इंटरनेट भी एक सशक्त जरिया बना है। नेट पर राजस्थानी को हर किसी ने चाहा तथा सम्मान दिया है। सरकारी वेबसाइटों पर भी अब राजस्थानी देखने को मिल रही हैं। श्रीगंगानगर जिला इस पहल की शुरुआत करने वाला पहला जिला है। इस जिले की सरकारी वेबसाईट पर राजस्थानी को सबसे पहले शामिल किया गया है। इंटरनेट पर राजस्थानी को अपनी पहचान दिलाने के लिए ब्लॉग सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं, इंटरनेट पर राजस्थानी भाषा और साहित्य के प्रचारक तथा साहित्यकार इन माध्यमों से निरंतर जुड़ रहे हैं।
राजस्थानी के ब्लॉग जो अभी तक सामने आएं हैं, उनमें राजस्थान की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के साथ-साथ दूसरे विषयों की जानकारी भी देखने में आती हैं। इंटरनेट पर राजस्थानी कीजो वेब-पत्रिकाएं सामने आई हैं, वे इस प्रकार हैं- सत्यनारायण सोनी और विनोद स्वामी संपादित 'आपणी भाषा-आपणी बात'
 , राव गुमानसिंह राठौड़ का 'राजस्थानी ओळखांण', नरेन्द्र व्यास का 'आखर अलख' व 'आखर कलश', दुर्गाप्रसाद अग्रवाल का 'जोग-लिखी', पतासी काकी का 'ठेठ देशी', नीरज दईया की मासिक वेब पत्रिका 'नेगचार', मायामृग का 'बोधि वृक्ष', राजस्थानी कविता कोश, जिसके संचालक प्रेमचंद गांधी हैं।
राजस्थानी के रचनाकारों के ब्लॉग में ओम पुरोहित 'कागद' का 'कागद हो तो हर कोई बांचै'
 
, रामस्वरूप किसान की राजस्थानी कहानियों का ब्लॉग
 
, संदीप मील का 'राजस्थानी हाईकू'
 
, 'बहती धारा'
 
, राव गुमानसिंह राठौड़ के 'राजिया रा दूहा'
 
, 'सुणतर संदेश'
 
, सत्यनारायण सोनी की राजस्थानी कहानियों का 'धान कथावां'
 
, शिवराज भारतीय का 'ओळूं'
 
, संग्राम सिंह राठौड़ का 'स्व. चंद्रसिंह बिरकाळी री रचनावां'
 
, डॉ. मदनगोपाल लढ़ा का 'मनवार'
 
, पूर्ण शर्मा 'पूरण' का 'मायड़ भाषा'
 
, जितेन्द्र कुमार सोनी (आई.ए.एस.) का 'मुळकती माटी'
 
, कवि अमृतवाणी का 'राजस्थानी कविता कोश'
 
, डॉ. नीरज दईया के 'सांवर दईया'
 
, 'राजस्थानी कवितावां'
 
, 'नेगचार'
 
, 'राजस्थानी ब्लॉगर'
 
'अनुसिरजण'
 
, डॉ. दुष्यंत का 'रेतराग'
 
, रवि पुरोहित का 'राजस्थली
 
', दीनदयाल शर्मा के 'टाबर टोळी'
 
, राजेन्द्र स्वर्णकार का 'शस्वरं
 
', अंकिता पुरोहित का 'कागदांश'
 
, किरण राजपुरोहित 'नितिला' का ''सिणगार'
 
, 'भोर की पहली किरण'
 
, संतोष पारीक का 'सांडवा', अजय परलीका का 'भटनेर'
 
व राजस्थानी गीतों का संग्रह 'बुगचो'
 
, दुलाराम सहारण के 'हरावळ'
 
, 'साहित्यकार दर्शन'
 
, 'आगीवांण'
 , 'हेलो' व 'पोथीखानो'
 
, नंद भारद्वाज का 'हथाई'
 
, पुखराज जांगिड़ का 'जय रामधनी'
 
, मोनिका शर्मा के 'तीज तैंवार'
 व 'मेरी परवाज'
 
, शिवराज गूजर के 'सिनेमा फेस्टिवल'
 
'मेरी डायरी'
 
, हरीश बी. शर्मा का 'मरूगंधा'
 , अलबेला खत्री का 'म्हारो प्यारो राजस्थान'
 
, उम्मेद गोठवाळ का 'अभिव्यक्ति'
 
, कुमार गणेश का 'रेजगार'
 
, चैनसिंह शेखावत का 'मायड़ रो गोथळियो'
 
, जोगेश्वर गर्ग का 'गूंगै रा गीत'
 
, सोहनलाल रांका का 'कवि सहज'
 
, डॉ. मदन सैनी, डॉ. मंगत बादल
 
, राजूराम बिजारणियां
 
, कविता किरण
 
, राजेश चड्ढ़ा
 
, सवाई सिंह शेखावत, संजय पुरोहित, सुनील गज्जाणी, हरीश भादाणी
 
, किशोर पारीक
 
, कृष्णा कुमारी
 
, चंद्र प्रकाश देवल
 
, निशांत
 
, पुरूषोत्तम यकीन
 
, बिहारी शरण पारीक
 
, मणि मधुकर
 
, मनोज कुमार स्वामी
 
, मालचंद तिवाड़ी
 
, रामेश्वर गोदारा 'ग्रामीण'
 
, लीटू कल्पनाकांत
 
आदि।
इंटरनेट पर राजस्थानी की मूल रचनाएं तथा अनूदित रचनाएं बहुत-सी पत्रिकाओं में निरंतर छपती रहती हैं। जिनमें- 'हिन्दी कविता कोश'
 
, नरेश व्यास का 'आखर कलश'
 
, प्रेमचंद गांधी का 'प्रेम का दरिया'
 
, रविशंकर श्रीवास्तव का 'रचनाकार'
 

राजस्थानी भाषा की मान्यता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के ब्लॉग भी हैं। जिनमें- कुंवर हनवंतसिंह राजपुरोहित के 'मरुवाणी'
 
'म्हारो मरुधर देश'
 
, विनोद सारस्वत का 'मायड़ रो हेलो'
 
, सागरचंद नाहर का 'राजस्थली'
 
, अजय कुमार सोनी के 'मायड़ रा लाल'
 
, 'राजस्थानी रांधण'
 
, राजस्थानी गीत गायक प्रकाश गांधी और जितेन्द्र कुमार सोनी के भी राजस्थानी ब्लॉग हैं।
राजस्थान के बारे में संपूर्ण जानकारियों को राजस्थानी भाषा में प्रस्तुत करने वाली प्रमुख वेब साईट- 'आपांणो राजस्थान'
 
है, जिसे इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्र सिंह पोकरणा संचालित कर रहे हैं।
इंटरनेट पर कई गांवों के भी ब्लॉग हैं जो राजस्थानी में हैं- सत्य दीप का 'मेरो गाँव'
 
, रतन सिंह शेखावत का 'मेरा गांव भगतपुरा'
 
की माध्यम भाषा तो हिन्दी है, परन्तु राजस्थानी चित्र व ऑडिया-वीडियो भी हैं। अब तो अत्यंत खुशी की बात है कि जल्द ही ऑनलाइन राजस्थानी टेलिविजन और रेडियो खुलने वाले हैं। जिन पर राजस्थानी में ही प्रसारण किया जाएगा। जिसकी पहुंच प्रवासी राजस्थानियों तक भी होगी। ऑनलाइन राजस्थानी टेलिविजन बतौर प्रयोग शुरू कर दिया गया है, जिसमें अभी रोजाना राजस्थानी गीत लगाए जाते हैं। इसका नाम अभी 'मरुवाणी'
 
रखा गया है और इसके सूत्रधार कुंवर हनवंतसिंह राजपुरोहित हैं जो लंदन में अपना कारोबार करते हैं।

फेसबुक पर राजस्थानी

फेसबुक पर भी राजस्थानी को अत्यंत सम्मान मिला है। फेसबुक पर राजस्थानी का सूत्रपात करने के लिए वरिष्ठ साहित्यकार ओम पुरोहित 'कागद'
 
का नाम गर्व से लिया जाता है। पिछले छ: महीनों से फेसबुक पर राजस्थानियों की संख्या में इजाफा हो रहा है तथा संवाद की माध्यम भाषा राजस्थानी बनी है। फेसबुक पर मुख्यत: राजस्थानी के साहित्यकार डॉ. नीरज दईया
 
, डॉ. सत्यनारायण सोनी
 
, रामस्वरूप किसान
 
, माधोसिंह मूंड
 
, अंजली पारेख
 
, सिया चौधरी
 
, अंकिता पुरोहित
 
, अनिल जांदू
 
, हनवंतसिंह राजपुरोहित
 
, विनोद सारस्वत
 
, भाषाविद् लखन गौसाईं
 
आदि। फेसबुक पर राजस्थान के निर्वाचित सांसद और विधायक भी राजस्थानी के लिए जुड़े हुए हैं, जिनमें बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाळ
 
, पूर्व राज्यमंत्री जोगेश्वर गर्ग
 
, नागौर सांसद ज्योति मिर्धा आदि।

पाकिस्तान में राजस्थानी

इंटरनेट के माध्यम से दुनियाभर के लोग पाकिस्तान में पसरी राजस्थानी संस्कृति से निरंतर परिचित हो रहे हैं। फेसबुक पर कई ऐसे वीडियो शेयर किए गए हैं जिनमें पाकिस्तान के कई राजनेता जनसभाओं को वहां के एक बड़े भू-भाग की जनभाषा राजस्थानी में संबोधित करते हुए देखे-सुने जाते हैं।
 
पाकिस्तान में राजस्थानी लोकसंगीत की भी धूम है, जिनके वीडियो भी बड़ी तादाद में शेयर किए गए हैं।
केन्द्र सरकार की उदासीनता के चलते राजस्थानी की मान्यता का सवाल अधरझूल में पड़ा है। इन उपलब्धियों को देखते हुए केन्द्र सरकार को चाहिए कि वह राजस्थानी भाषा को तत्काल संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करे।


Regards
Ajay Kumar Soni
VPO- Parlika, Teh- Nohar, Dist- Hanumangarh
(Rajasthan) PIN- ३३५५०४
E-Mail- ajay@parlika.com
Mobile- 96024-12124

पाखाना कि खजाना

रामगढ़ की तर्कशील सोसायटी ने किया रहस्योद्घाटन

गायब हुआ धन पाखाने की कुंई में खोज निकाला

विनोद स्वामी व अजय सोनी
परलीका. घर में बना पाखाना परिवार का गायब हुआ धन उगलने लगा तो देखने वाले हैरान रह गए। घटना हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील के भगवान गांव की है। महेन्द्र सिहाग के घर से गत नौ माह से रुपए, जेवर तथा अन्य सामान गायब हो रहा था। जिसे वे दैवीय आपदा या प्रेत-बाधा मानते रहे और झाड़-फूंक वाले सयाणों के चक्कर में पड़े रहे। आखिरकार 16 दिसंबर गुरुवार की रात रामगढ़ की तर्कशील सोसायटी ने रहस्योद्घाटन किया तथा गायब हुआ धन पाखाने की कुंई में खोज निकाला।
सोसायटी ने परिवार के सभी सदस्यों, आस-पड़ोस तथा अन्य संबंधित लोगों से गहन पूछताछ कर हकीकत का पता लगाया और यह रहस्योद्घाटन किया। सोसासटी ने इसे महज मानवीय शरारत माना है तथा शरारती का नाम पूर्णतया गोपनीय रखा गया है। ग्रामीणों की मानें तो इस घटना के बाद उनका जंत्र-मंत्र, डोरा-डांडा व ओझा-सयाणों से विश्वास उठ गया है।

यूं रहा घटनाक्रम

गत मार्च माह में महेन्द्र की पत्नी की सोने की अंगूठी गायब हो गई। इसे उन्होंने भूल से कहीं रखी मानकर या सामान्य चोरी मानकर संतोष कर लिया। फिर घर पर रखे नगदी रुपए अक्सर कम होने लगे। शाम को अगर पांच हजार रुपए कहीं से लाकर रखते तो सुबह तीन हजार ही मिलते। अगस्त 2010 में अचानक घर में ऐसी घटना हुई कि सारे गांव में चर्चा का विषय बन गया। घर से करीब 9 तोला सोने तथा आधा किलो चांदी के गहने संदूक से गायब हो गए। इस घटना से सभी घरवालों के मन में भय व्याप्त हो गया। पास-पड़ोस, रिश्तेदारों से राय आने लगी कि घर में कोई छाया या ओपरी का प्रभाव है। इसे कोई सयाणे को दिखाओ। इसके बाद वे अलवर के एक सयाणे के पास गए जिसने चार किलो घी जोत के लिए व 20 हजार रुपए मांगे और समस्या के समाधान का जिम्मा लिया। इसी क्रम में झुंझुनू, बींझबायला, पल्लू, रावतसर, लखूवाली इत्यादि दर्जनभर गांवों के झाड़-फूंक, डोरा व तंत्र-मंत्र वालों के चक्कर काटते रहे। वे लोग अपनी-अपनी पूजा-पद्धत्ति व पाखंड से उनसे प्रसाद व जोत के खर्चे के साथ-साथ नगदी तक की मांग करते रहे। किसी ने पड़ोसियों को चोर ठहराया तो किसी ने घर में ही रोग बताया। किसी ने भूत-प्रेत की बाधा तो किसी ने इसे ओपरी का नाम लेकर डर पैदा किया। नोहर के एक पुजारी, ऐलनाबाद के कम्प्यूटर से जंत्री बनाने वाले पंडितजी तथा अबोहर की तांत्रिक औरत द्वारा हिजरायत में अपराधी को दिखाने सहित पल्लू में जोत वाले बाबा ने उनके डर व मानसिक भय को और ज्यादा बढ़ा दिया।
यह सिलसिला रुका नहीं तथा घर में रोज ऐसी घटनाएं होने लगी। घर से रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी गायब होने लगा। ताला-चाबी से लेकर बच्चों के स्कूल बैग व तणी पर सूखते कपड़े गायब होने लगे। पूरा परिवार भय से विचलित हो गया। सयाणों ने सलाह दी कि यह घर छोड़ देने में ही परिवार का भला है। अचानक होने वाली इन घटनाओं के पीछे इस परिवार ने कोई आलौकिक शक्ति का हाथ मान लिया तथा इससे मुक्त होने के लिए पाखंडियों के धक्के चढ़ते रहे।
एक रिश्तेदार ने रामगढ़ की तर्कशील सोसायटी के बारे में बताया तो फोन पर संपर्क कर सारी घटना से सोसायटी को अवगत कराया। दिसंबर माह की 11 तारीख को अन्वेषण शुरू हुआ। सोसायटी के सदस्यों की बातों पर इस परिवार को शुरू में यकीन भी नहीं हुआ। तर्कशील सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी, रामगढ़, गोगामेड़ी तथा परलीका गांव की तर्कशील टीम सदस्यों ने भगवान गांव जाकर पूरी स्थिति का जायजा लिया और इस परिवार को भरोसा दिलाया कि घर के पाखाने की कुंई में सारा सामान मौजूद है। बैटरी की रोशनी से वहां देखा गया तो कपड़े जैसा कुछ दिखाई दिया।
अगले दिन सुबह जब ग्रामीणों ने कुंई का चौका हटाकर सामान निकालना शुरू किया तो मौके पर मौजूद ग्रामीण हैरत में पड़ गए। 
ग्रामीणों ने तर्कशील सोसायटी के राममूर्ति स्वामी, महेन्द्र सिंह शेखावत, रामकुमार कस्वां, दलीप सहू, आत्मप्रकाश स्वामी, विनोद स्वामी, लीलूराम व अजय को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

 
भगवान गांव में पाखाने से रुपए व जेवर निकालते समय मौजूद ग्रामीण।
 
पाखाने से निकले रुपए।
 
पाखाने से निकले सोने-चांदी के जेवर।
 
तर्कशील टीम के साथ परिवार के लोग व ग्रामीण।

क्यों होती हैं ऐसी घटनाएं

तर्कशील सोसायटी के अनुसार इस प्रकार की घटनाओं के पीछे किसी प्रकार की आलौकिक शक्ति का हाथ नहीं होता वरन सामाजिक समन्वय के अभाव में उपजी खंडित मानसिकता की मानवीय शरारतें होती हैं। भगवान गांव की घटना में भी इसी प्रकार की मानवीय शरारत है। तर्कशील सोसायटी का मानना है कि ऐसी शरारत एक मानवीय भूल होती है, अत: शरारती को सुधरने का मौका मिले तथा वह समाज मेें उचित मान-सम्मान से जी सके इसलिए नाम गोपनीय रखा जाता है।

मतिभ्रम का मनोवैज्ञानिक खेल है हिजरायत

तथाकथित तांत्रिक दर्पण, नाखून या दीपक में उस परिस्थिति या घटना को दर्शाने का दावा करते हैं, जो अक्सर छोटे बच्चों को दिखाई जाती है और यह एक मतिभ्रम का मनोवैज्ञानिक खेल है। इसका सहारा लेकर पाखंडी लोग लोगों को मूर्ख बनाते हैं। इसमें लेशमात्र भी सच्चाई नहीं होती है। दर्पण, कालिख लगे नाखून या दीपक की जोत में एकटक बिना पलक झपके देखते हैं तो शुरू मे जो वस्तु सामने होती है वही दिखाई देती है, पर लगातार एक ही तरफ देखने से ऑप्टिक नर्व थक जाती है और उसमें सुन्न होने लगती है और दिमाग को वह पहले जो संदेश दे रही होती है वह नहीं दे पाती। बल्कि बालक के अचेतन में ऐसा संदेश एक रील की भांति पहले से ही चलता रहता है जो उसने पहले सुन रखा हो। फलस्वरूप उसे वही घटना दिखती प्रतीत होने लगती है।

धार्मिक श्रद्धा का नाजायज लाभ

सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी का मानना है कि तांत्रिक व पाखंडी आदि लोग धार्मिक श्रद्धा का नाजायज लाभ उठाते हैं और ऐसे पीडि़त परिवारों को एक-दो चीज डराने वाली दिखाकर अपने प्रभाव में ले लेते हैं। वे जादू का सहारा लेकर आग लगना, नींबू से खून टपकना, रेत की चुटकी से पानी मीठा करना, हाथ में चीजें गायब करना आदि दिखाकर प्रभाव उत्पन्न करते हैं। दूसरी तरफ किसी बड़े लाभ का लालच देकर अपनी लूट का शिकार उन्हें बनाते हैं। इससे पूर्व में भी सोसायटी ऐसी सैकड़ों घटनाओं का समाधान कर चुकी है। बौद्धिक वर्ग अपने चिंतन का उपयोग सामाजिक परिवेश को बदलने में करे तो वह दिन दूर नहीं जब समाज में अंधविश्वास रहित स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा।

प्रतिबंध लगे पाखंडियों पर

''पांखडियों का जाल दिनोदिन बढ़ता जा रहा है और इन पर कोई अंकुश नहीं है। सरकार को चाहिए कि इन पर प्रतिबंध लगाया जाए और कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।'' -साहबराम सिहाग, ग्रामीण, भगवान।

रिपोर्टर के मोबाइल नम्बर : 9829176391(Vinod Swami), 9602412124(Ajay Soni)
प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी के मोबाइल नंबर- 8104313679