''अपनी माटी'' वेब मंच:-अक्टूबर अंक


नमस्कार
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सादर,

माणिक;संस्कृतिकर्मी
17,शिवलोक कालोनी,संगम मार्ग, चितौडगढ़ (राजस्थान)-312001
Cell:-09460711896,http://apnimaati.com



मीरा महोत्सव;- डांडिया-गरबा रास देखने उमड़े शहरवासी

रविवार,24 अक्टूबर, 2010 दैनिक भास्कर
मीरा महोत्सव के तहत गोरा बादल स्टेडियम में शनिवार रात गरबा डांडिया रास आयोजित किया गया। जिसमें गरबा नृत्यों पर प्रस्तुतियां देखने लोग उमड़ पड़े।
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मीरा स्मृति संस्थान की ओर से मीरा महोत्सव के तीन दिवसीय महोत्सव के तहत शनिवार रात नौ बजे गोरा बादल स्टेडियम में गरबा डांडिया रास महोत्सव का शुभारंभ पूर्व चेयरपर्सन आनंदकंवर सांदू व संस्थान अध्यक्ष सत्यनारायण काबरा ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। प्रतियोगिता में गुजरात की एक तथा चित्तौडग़ढ़ की आठ टीमे भाग ले रही है। इसमें नव दुर्गा मित्र मंडल अशोकनगर, मेवाड़ महोत्सव समिति, जय मां गरबा रास, जय अंबे महोत्सव, शास्त्रीनगर युवा समिति, माहेश्वरी युवा मृदुल सेवा समिति, इंपीरियल क्लब जिंकनगर, नवयुवक मंडल खटीक समाज की टीमों ने भाग लिया। गुजरात की ऊंकार कलाविृंद के कलाकारों ने प्रस्तुति शुरू की।

इधर, मीरा महोत्सव के तहत गोरा बादल स्टेडियम में शुक्रवार रात जितेन्द्र जैन एंड पार्टी की भजन प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत की गई दो नृत्य नाटिकाओं ने जमकर दाद लूटी।

गणपति व सरस्वती वंदना के बाद संगीतकार जितेन्द्र जैन ने'धरती धोरां रीÓ सुनाया। उन्होंने लगान फिल्म के गीत 'ओ पालनहारे, तुम बिन हमरा कोऊ नहींÓ प्रस्तुत किया।

नृत्य नाटिका ने किया भाव-विभोर

भजन संध्या में कलाकारों ने नृत्य नाटिका 'भगत के वश में है भगवानÓ की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। इस नाटिका में एक महिला द्वारा भगवान कृष्ण की अटूट भक्ति व समर्पण, उसकी बहुओं द्वारा भगवान की प्रतिमा को फेंकना, महिला के पगला जाने, डाक्टर द्वारा प्रतिमा के चेकअप करने आदि प्रसंगों के दिल छू लेने वाले मंचन पर पांडाल तालियों से गूंज उठा। इसके बाद एक अन्य नाटिका 'मेरो तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोईÓ में कृष्ण भक्ति से खफा होकर मीरा पर राजपरिवार के अत्याचार का मंचन

किया गया।

एक गीत से खफा हुए श्रोता

गायिका रीना दास ने भजनों के बीच एक राजस्थानी गीत 'मैं पालो कैयां काटूं जी, रेल में न बैठूं भंवरजी, मोटर में न बैठूंÓ सुनाया तो कई श्रोताओं ने इस पर आयोजकों के समक्ष प्रतिक्रिया दी कि इस तरह के गीत मीरा महोत्सव की संस्कृति के अनुरुप नहीं हैं। इसके बाद जब रीना एक और गीत सुनाने वाली थी तो उन्हें रुकना पड़ा।

मीरा महोत्सव के दूजे दिन की शाम का आयोजन और फोटो रपट

गूंजी स्वर लहरियां
राजस्थान पत्रिका
Saturday, 23 Oct 2010
चित्तौड़गढ़। मीरां स्मृति संस्थान की ओर से तीन दिवसीय मीरां महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार सवेरे दुर्ग स्थित मीरां मंदिर मे भजनों की स्वर लहरियों पर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए।
मीरां भजन संध्या में मंदसौर के ललित बटवाल,दिल्ली के महेन्द्र पुरोहित ने भजनों से समां बांधा। भजनों पर कई श्रोता भाव विभोर हो गए। कार्यक्रम के दौरान बाहरी पर्यटकों ने भी भजनों का आनंद लिया। भजन गायकों ने 'आली म्हाने लागो वृदांवन', 'श्याम मिलन की प्यासी अंखियां', 'मेरो मन राम ही राम रटे', 'राम चरण सुख दाई' सहित कई भजनों की प्रस्तुति दी। गायकों का संस्थान के कार्यवाहक अध्यक्ष सत्यनारायण काबरा, सचिव एस.एन. समदानी ने सम्मान किया। मीरां महोत्सव का आगाज गुरूवार रात्रि सवा आठ बजे गोरा बादल स्टेडियम मे हुआ।भजन गायक सतीश देहरा ने भजनों की प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि जिला कलक्टर आरूषि मलिक ने भजन संध्या का शुभारंभ किया।
अध्यक्षता हिन्दुस्तान जिंक लि. के सीएसआर मेहता, विशिष्ट अतिथि पालिकाध्यक्ष गीतादेवी, उपाध्यक्ष संदीप शर्मा आदि थे। अतिथियों, भजन गायकों का संस्थान के कार्यवाहक अध्यक्ष सत्यनारायण काबरा, सचिव एस.एन. समदानी आदि ने स्वागत किया। गायकों ने कई भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव विभोर किया। भजन गायक सतीश देहरा गायिका दीपमाला ने भजनों की प्रस्तुति दी। भजन संध्या के बाद इसी मंच पर रात्रि में नृत्य नाटिका का मंचन किया गया। कलाकार गौरीराव मेहता मुम्बई एवं अन्य कलाकारों ने मीरां की भक्ति पर आधारित नृत्य नाटिका से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। संगीत, संवाद और मंच पर चल विद्युत सज्जा अलग सी बन पड़ी।






















मीरा महोत्सव,चित्तौड़गढ़ -2010

बाईस की सुबह,मीरा मंदिर,दुर्ग चित्तौड़
भजन गायक महेंद्र पुरोहित-नई दिल्ली
और ललित बटवाल -मंदसौर
कार्यक्रम के कूछ खास फोटो आप सब के लिए










कवि अमृत 'वाणी' द्वारा भजन गायक महेंद्र पुरोहित और ललित बटवाल जी को सांवरा सेठ चालीसा भेट करते हुवे |
:-Shekhar Kumawat

सादे विचारों वाले साहित्यकार महाराज शिवदान सिंह




चित्तौड़गढ़ में राजस्थानी कवि का सम्मान
मेवाड़ के बहुत गहरी समझ वाले राजस्थानी के सादे विचारों वाले साहित्यकार महाराज शिवदान सिंह के दोहों को लेकर चित्तौडगढ में सेंथी स्तिथ डॉ. सत्यनारायण व्यास के निवास स्थान पर पंद्रह अगस्त की शाम चार बजे नगर के प्रबुद्ध लोगों के बीच एकल काव्य पाठ आयोजित किया  गया.बहुत अरसे के बाद नगर में हुए इस काव्य पाठ के पहले सत्र में कवि शिवदान सिंह के विस्तृत परिचय के साथ ही संभागियों का स्वागत डॉ. व्यास ने किया.अभी तक प्रकाशित अपनी  तीन किताबों की प्रतिनिधि  रचनाओं को पढ़ते हुए कवि सिंह ने श्रोताओं को भाव विभोर किया. सिंह ने दोहे पढ़ने से पहले अपने कवि बनने तक का का सफ़र व्यंग शैली में जताया .कुछ गहरी समझ और कुछ नए नवेले श्रोताओं को ये काव्य पाठ अलग अलग स्तर पर प्रभावित करता रहा.
मूल रूप से भीलवाड़ा  जिले के कारोई के महाराजा होते हुए भी फूटपाथ  की सी रचनाएँ करते हुए शिवदान सिंह ने जीवन की अनुभूतियों को बहुत गंभीरता के साथ अपने साहित्य कर्म में समेटा है.सतत्तर सालों की उम्र पार कवि सिंह बेहद सरल और मृदुभाषी है.राजस्थानी के साथ-साथ वे मूर्तिकला और चित्रकारी में भी महारथ हासिल व्यक्तित्व हैं.उनकी प्रकाशित किताबों में ''कुण दूजो कोइ न'',''जो सुगमाना जीवणा'',''मैं मन हूँ'' हैं.यथासमय उन्हें सम्मानित भी किया जाता रहा है.ख़ास तौर पर सोरठा दोहों की रचना करने वाले शिवदान ने जो दोहे पढ़े उनमें ईश्वर,मन,मेहमान,राह,प्रकृति,ब्रमांड,जीवन,रोग,दवाई आदि विषय को समेटा.

डॉ. व्यास और डॉ. ओमा आनंद सरस्वती ने शिवदान के व्यक्तित्व पर कहा कि वो गाय द्वारा पांतरे दिए जाने वाले देशी घी की तरह हैं.मेवाड़ के इस गौरवशाली कवि को पहली बार चित्ताद में ढंग से सूना जा रहा था.उनके दोहे बहुत क्लिष्ट नहीं होकर बहुत रूप में लोक जीवन से जुड़ाव वाले हैं.इस तरह की रचानाओं को समझने में लोक जीवन से जुड़ा आदमी सहज अनुभव करता है.सही मायाने में शिवदान का रचना कर्म और वे खुद अल्पज्ञात हैं.उनके दोहों में धारा प्रवाह और सम्प्रेषणियता विद्यमान है.  सम्पूर्ण समूह ने ऐसी घोष्ठियों  को सतत करने की ज़रूरत व्यक्त की.

गोष्ठी के दूजे सत्र में नगर के आमंत्रित कवियों ने  भी प्रतिनिधि  रचनाएँ भी पढी जिससे माहौल पूरी तरह से सार्थक बन पढ़ा.जिनमें शिव मृदुल,नन्द किशोर निर्झर ,मनोज मख्खन,गीतकार रमेश शर्मा,अब्दुल जब्बार और श्रीमती व्यास शामिल हैं.गोष्ठी में डॉ. आर.के.दशोरा,रेणु व्यास,डॉ. कनक जैन,प्राचार्य एस.के.जैन,प्रो. एल.एस.चुण्डावत,डॉ. सीमा श्रीमाली,पत्रकार जे.पी.दशोरा,सरोकार संस्था संयोजक विकास अग्रवाल,प्राध्यापक गोविन्द राम शर्मा,चन्द्रकान्ता व्यास, सिंहशावक राणावत,शिव शंकर व्यास उपस्थित  थे. अंत में आभार शिक्षाविद डॉ. ए.एल.जैन ने व्यक्त किया.

कुछ तस्वीरें 
डॉ. सत्यनारायण व्यास और शिवदान जी (दाडी में )
शिवदान जी और शिव मृदुल जी
डॉ. आर.के दशोरा जी के साथ जाते जाते
रेणु व्यास साथियों के साथ
गीतकार रमेश शर्मा गाते हुए
नन्द किशोर निर्झर
शिव मृदुल
अब्दुल ज़ब्बार
मनोज मख्खन
डॉ. सत्य नारायण व्यास
ओमानंद जी









सादर 
स्पिक मैके राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य