महर्षि मेँहीँ आश्रम, कुप्पाघाट, भागलपुर

1. प्रारंभिक उत्सुकता

जब भी मैंने संतमत परम्परा और महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज का नाम सुना, मन में गहरी श्रद्धा और जिज्ञासा जगी। कई शिष्यों और भक्तों से मैंने सुना था कि भागलपुर के गंगा किनारे स्थित कुप्पाघाट आश्रम न केवल साधना का एक अद्वितीय केंद्र है बल्कि वहाँ का वातावरण मन को अद्भुत शांति और ऊर्जा प्रदान करता है। इन्हीं प्रेरणाओं से एक दिन मैंने वहाँ की यात्रा करने का निश्चय किया।


2. यात्रा की शुरुआत 🚆

गंगा तटवर्ती यह नगर बिहार का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र है। स्थानीय लोगों से आश्रम का रास्ता पूछा। उन्होंने स्नेह से बताया—“कुप्पाघाट जाने के लिए रिक्शा या ऑटो ले लीजिए, वहीं गंगा किनारे आपको महर्षि मेँहीँ आश्रम मिल जाएगा।”

 रास्ते में भागलपुर शहर की चहल-पहल, पुरानी इमारतें और गंगा के दर्शन यात्रा को और सुखद बनाते हैं।


3. आश्रम का प्रथम दर्शन 🏞️

जैसे ही मैं कुप्पाघाट पहुँचा, सामने गंगा की कल-कल धारा और उसके किनारे पर स्थित विशाल आश्रम का दृश्य मन को मोहित कर गया। शांत वातावरण, हरे-भरे वृक्ष, खुले आकाश और मंदिरनुमा भवन देखकर ऐसा लगा जैसे किसी दिव्य लोक में आ गया हूँ।

आश्रम का प्रवेशद्वार सरल और पवित्र भाव जगाने वाला है। भीतर प्रवेश करते ही भक्तजन और साधकों का आवागमन दिखाई दिया। सभी के चेहरे पर शांति और संतोष झलक रहा था।


4. महर्षि मेँहीँ जी की समाधि स्थल 🙏

आश्रम के मध्य भाग में महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की समाधि स्थित है। यह स्थान अत्यंत पवित्र और आकर्षक है। वहाँ पहुँचते ही मन अपने आप श्रद्धा से झुक गया। समाधि के चारों ओर गहरा सन्नाटा और भजन-ध्वनि वातावरण को दिव्य बना देते हैं।


5. गंगा तट का अलौकिक अनुभव 🌊

आश्रम का सबसे सुंदर पक्ष है—उसका गंगा तट। गंगा की लहरें, मंद-मंद बहती हवा और तट पर साधकों का ध्यानमग्न बैठना देखने योग्य दृश्य है। मैंने भी वहीं बैठकर थोड़ी देर ध्यान लगाने का प्रयास किया। मन अपने आप शिथिल हो गया और भीतर गहरी शांति का अनुभव हुआ।


6. साधना और सत्संग का माहौल 🕉️

आश्रम में प्रतिदिन प्रातः और सायं सत्संग और ध्यान का आयोजन होता है। संतमत परम्परा के अनुयायी वहाँ एकत्र होकर महर्षि मेँहीँ जी के उपदेशों का स्मरण करते हैं।

  • साधना के समय वहाँ की घंटी, शंख-ध्वनि और भजन से वातावरण गूँज उठता है।

  • संतमत की मुख्य साधना — श्रवण, मनन और ध्यान — का अभ्यास करवाया जाता है।

  • शिष्यों द्वारा अनुभव साझा करने से मन को गहरी प्रेरणा मिलती है।


7. आश्रम का जीवन और अनुशासन 🌿

आश्रम में अत्यंत सादा जीवन शैली अपनाई जाती है।

  • यहाँ स्वच्छता और शांति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

  • भोजन सात्त्विक होता है।

  • सभी आगंतुक अनुशासन का पालन करते हैं।

मुझे यह देखकर अच्छा लगा कि कोई भी व्यक्ति यहाँ आकर साधना कर सकता है, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग का हो।


8. स्थानीय लोगों से भेंट 🤝

आश्रम के आसपास के ग्रामीण और शहरवासी भी वहाँ आते हैं। उनसे बातचीत करने पर पता चला कि महर्षि मेँहीँ जी ने अपने जीवन का एक लंबा काल यहीं व्यतीत किया और यहाँ से संतमत का प्रचार-प्रसार किया। लोगों के जीवन में उनका प्रभाव आज भी उतना ही गहरा है।


9. मेरा व्यक्तिगत अनुभव 💫

इस यात्रा ने मेरे भीतर गहरा आध्यात्मिक प्रभाव छोड़ा। गंगा तट की शांति, महर्षि जी की समाधि का दर्शन और आश्रम का वातावरण — सबने मिलकर मन को निर्मल और प्रफुल्लित कर दिया।

मैंने अनुभव किया कि यह केवल एक आश्रम नहीं बल्कि आत्मिक साधना और आंतरिक यात्रा का द्वार है।


10. यात्रा का समापन 🌸

संध्या समय गंगा आरती के बाद मैंने वापसी की तैयारी की। गंगा की लहरों के बीच दीपों की पंक्तियाँ देखकर मन रोमांचित हो उठा। लौटते समय ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपने भीतर एक नई ऊर्जा, नई शांति और जीवन का नया दृष्टिकोण लेकर वापस जा रहा हूँ।


✍️ निष्कर्ष

महर्षि मेँहीँ आश्रम, कुप्पाघाट, भागलपुर की यह यात्रा मेरे जीवन की एक स्मरणीय आध्यात्मिक यात्रा रही। यदि कोई साधना, भक्ति और शांति की तलाश में है, तो उसे एक बार इस आश्रम में अवश्य जाना चाहिए।

Dr. Chandra Shekhar Changeriya




 

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