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गांधी चौक में पेश की हास्य रचनाएं



चित्तौडग़ढ़ त्न गांधी चौक में गुडएज क्लब की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि निम्बाहेड़ा विधायक उदयलाल आंजना व विशिष्ट अतिथि कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवदयाल शर्मा थे। अध्यक्षता कांग्रेस जिला महामंत्री प्रमोद सिसोदिया ने की।

क्लब संरक्षक हरिशंकर पांडिया के नेतृत्व में आयोजित हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने रचनाएं पेश की। लक्ष्मीचंद सुमन के संचालन में कवि श्याम अंगारा, गिरीश विद्रोही, संगीता सरल, खूबचंद मस्ताना, शेखर आजाद, अमृतलाल चंगेरिया, दीपक हृदयेश कनेरा, मनोज मक्खन सहित अन्य ने हास्य रचनाएं पेश की। भोर तक चले कवि सम्मेलन में गुडएज क्लब अध्यक्ष फतहलाल सोनी, सचिव सोनू सोनी, बाबू डांगी, विजय सोनी, मोनू सोनी, नारायण सोनी, मुकेश सेन, योगेश पंडिया, मयंक पंडिया, करण पंडिया, सावन सोनी, पंकज सोनी, मोहित गौड़ सहित अन्य ने स्वागत किया। क्लब की ओर से सभी गणपति महोत्सव समितियों व महावीर व्यायामशाला के उस्तादों, राजकमल बैंड का सम्मान मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर किया गया।

चित्तौडग़ढ़. गांधी चौक में आयोजित कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते कवि। 


कविता पाठ करते हुवे कवि  " अमृत वाणी "



श्री सांवलिया जी तक की हमारी पैदल यात्रा

साथियों इस बार मै आप के लिए लाया हूँ चित्तोडगढ से श्री सांवलिया जी ( मण्डफिया ) तक 40 KM की हमारी पैदल यात्रा वृतांत जिसका मेरा अपना अनुभव बड़ा ही रोचक रहा |
मै अपनी इस यात्रा को आप सब के साथ बाटना चाहता हूँ हम अपने घर से शाम को ठीक 8:00 PM को रवाना हुई और पूरे तेरह घंटो तक की इस शानदार यात्रा मे मेरे साथ मेरे तीनो भाई चेतन , राहुल , और धनेश ,साथ ही हमारे मित्र अनिल का साथ तो मिला ही साथ मे पिताजी और उनके घनिष्ट मित्र गोपाल जी के इस सहयोग से हमारी ये यात्रा सफलता पूर्वक हमने पूरी की मगर हाँ अपनी इच्छा शक्ति से इन्सान क्या नहीं कर सकता है हमें रास्ते मे ऐसे भी लोग मिले है जो अपने निवास से कई किलोमीटर की यात्रा कई - कई दिनों तक पैदल चलते हुवे पूरी कर रहे थे , उस परम पिता परमात्मा की कोई तो शक्ति है जो उन्हें अनवरत चलने की शक्ति प्रदान करती है |
अब आप भी लीजिये हमारी उस यात्रा का आनंद |




रास्ते मे मिले एक ट्रक वाले की सहायता






रास्ते में चल रहे लंगर पर भोजन करते हुए




बाद मे सेवा करते हुए
राधे - राधे की धुन पर नाचते हुए








आगे की यात्रा पर विचार विमर्श करते



पापा के साथ बेखोफ चलता हुवा








30 km चलने के बाद आराम करतेहुए
यहाँ तो ये हाल है मुझे पता ही नहीं कि मै कहा पर सो गया
रास्ते मे हैंडपंप से प्यास बुझाते




2.5 कि.मी. दूर मन्दिर मे आराम करते हुए



सारी रात अपनी टोर्च की लाइट से हमें रास्ता दिखाने के बाद अब इन्हें आदत सी पड़ गई|


गाँव का माहोल वाक़य बेहद खूब सूरत होता है ये मैने अब जाकर अनुभव किया जब 5:00 AM पर पक्षियों के समूह गान ने भोर का स्वागत किया |

श्री सांवलिया जी के मंदिर की एक झलक पाते ही मन को वो उत्साह मिला जेसे सारी थकान उतर गई हो








और हम से पहले हजारो लोगो की इस भीड़ ने हमारा उत्साह और बढाया और सारी थकान उतार दी

कृष्ण धाम सांवलिया की कूछ शानदार तस्वीरे



अब बारी है दर्शन के लिए लाइन मे लगने की


जबरदस्त सुरक्षा इंतजाम के साथ बेहतरीन व्यवस्था


















https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiRZoQ-TKB_bg-Mnxi6jHOLB2jq6rUXPmJiySzfl4lLfvLrHAqFrqUg_MSZwhK6akmzazWo0ItF3SZPCiCcewMR4am5iBZ5yqznrIbfC0U6h83jTgx2E8WvLHuhw7M1AcaSdQJQXHltL0w/s400/book+1.jpg



कवि अमृत वाणी द्वारा दर्शनार्थियों को स्वरचित पुस्तक सांवरा सेठ चालीसा भेट करते हुवे











और हम चल पड़े अब अपने घर की और !
:- शेखर कुमावत